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कविता
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| हरिबाबू बिंदल का हास्य संसार |
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हरिबाबू बिंदल से ‘विश्वा’ के पाठक परिचित हैं ही। आप व्यवसाय से इंजीनियर हैं, परंतु हृदय से कवि हैं। मूलतः आगरा के रहनेवाले हैं। संप्रति वाशिंगटन डी.सी. में रहते हैं। आप हास्य-व्यंग्य लेखन में निष्णात हैं। दो काव्य-संग्रह भी प्रकाशित हो चुके हैं। प्रस्तुत है हरिबाबू की हास्य रचनाएँ।
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जय सरस्वती माता हंस वाहिनी, वीणा वादिनी, श्वेत वसन माता, स्वर बुद्धि की देवी, सबको ईक्वल नहीं बाँटा। जय सरस्वती माता!विद्यावान बनाया कोई, मूर्ख कोई भ्राता, ज्ञान बराबर नहीं दिया, ओ विद्या दाता। जय सरस्वती माता!बोली कोई कोयल जैसी, कोई मिमियाता, नहीं दिया स्वर सबको, ओ स्वर की ज्ञाता। जय सरस्वती माता!ब्रह्माजी ने दिए बराबर, अंग और ढाँचा, ज्ञान और स्वर देने में, कर दिया दुभाँता। जय सरस्वती माता!कीजे सब पर दया बराबर, स्वर बुद्धि दाता, कृपा करो बिंदल पर, इनको गाना नहीं आता। जय सरस्वती माता! नारी तुम ऐसी सबला हो नारी तुम ऐसी सबला हो करती घायल वीरों को भी कहलाती फिर भी अबला हो। नारी तुम...दुनिया में जितने युद्ध हुए सब नारी को प्रतियुक्त हुए सुलगा देती हो चिनगारी करती अदृश्य तुम हमला हो। नारी तुम...घर में करती मनमानी हो तुम कोपभवन की रानी हो जो चाहो वह मनवा लेती ऐसा लेती तुम बदला हो। नारी तुम...बाहर सबके मन भाई हो अंदर से दियासलाई हो नहीं जान सके ज्ञानी-ध्यानी ऐसी रहस्य का मसला हो । नारी तुम...आशिक हो जाते हैं पागल हो जाते ऋषि मुनि घायल नेताओं के भी दिल दहले नहले पर तुम एक दहला हो। नारी तुम... बीवी का भाषण बबलू बोला, मेरी बीवी जब भाषण देती है, किसी विषय पर घंटे भर वो बोल लेती है। लेती है वो बोल, रुकावट होती नहीं उसको, नहीं सुहाई ये बकबक, बबलू की डबलू जी को। बोला, तेरी बीवी तो बोले है किसी विषय पर, मेरी बीवी बिना विषय, दिन भर बोले फर-फर। होटल का खाना घर आते ही पति ने पत्नी को प्यार जताया, बोला, खाना चलकर होटम में जा खाया, होटल में जाए खाया, कुछ नया हुआ क्या?मेरा खाना खाने से, तुम बोर हो गए हो क्या? पति बोला, नहीं डार्लिंग, ऐसी बात नहीं है, बरतन करने की अपनी, तबीयत आज नहीं है। लड़ाकू बीवी क्रियाकर्म पत्नी का करके बाँकेलाल, जैसे ही लौटे हुआ, मौसम का बेहाल, मौसम का बेहाल, जोर से बिजली कड़की,बाँके ने सोचा, है खबर ये शुभ लक्षण की। उतर गया उनके मन का एक आखिरी भार, निश्चय ही बीवी अब पहुँच गई उस पार। कल से बंद लिखा आज के पेपर में, पीना बुरा शराब, दिल और दिमाग को, करती है ये खराब। करती है ये खराब, उनको आई बात पसंद,बोला, कर दूँगा मैं, इसको कल से बंद। बंद करोगे पीना कल से, हँसी पत्नी सुनकर, पति बोला, पीना नहीं, बेवकूफ यह पेपर। लैला मजनूँ लाला लल्लूलाल ने हमसे यह कहा, लैला मजनूँ में कोई, फर्क नहीं रहा। फर्क नहीं रहा, बाल लंबे या छोटे,दोनों पहन सकते, पाजामा और कुरते। आजकल तो यह संभव हो सकता है, मजनूँ कभी लैला भी बन सकता है। अंग्रेजी नाम हरी से हैरी हुए, जोहरी हो गए जैरी कजरी कैरी हो गई, लहरी हो गए लैरी इतने तक तो ठीक था अंग्रेजी का संग फूलचंद जी फूल हुए, बन गया एक व्यंगबन गया एक व्यंग, जानकी जैनी हो गई जगदीश्वर हुए जैक, रुकमनी रैनी हो गई कहँ बिंदलजी, नामों की हुई ऐसी खिल्ली ललिता जी कहलाएँगी अब मैडम लिल्ली। सारा पालेन जरदारी भेंट यू एन ओ में पहुँचकर, किया सभी को खुश, जरदारी से मिली तो, वे हुए बेहद खुश। बेहद इतने खुश, गोर्जियस हो बतलाया,वे चाहें तो गले लगें, ऐसा फरमाया। मुल्लाजी भड़के, कर दिया फतबा जारी, इसलामी नजरों में, नापाक हुए जरदारी। मनमोहन जी चेहरा मनमोहनजी का, कभी किया है ध्यान? उनके चेहरे पर हमने, नहीं देखी मुसकान। नहीं देखी मुसकान, हमेशा दिखें सीरियस,हावभाव में उनके, झलके है मासूमियत। इस बार न्यूयॉर्क में, मिली जो सारा पालेन, फोटो उनका देखिए, मुसकाए मनमोहन। बिल क्लिंटन की दूसरी भारत यात्रा बिल क्लिंटन को आ गई भारत यात्रा रास पुनः गए, फिर से किया उसी जगह पर वास उसी जगह पर वास, और यह भी बतलाया,भारत उनके दिल दिमाग दोनों पर छाया। यह सब तो है ठीक, मगर सुनिए मेरी हुजूर अपनी मोनिकाओं को, रखना उनसे दूर। नया जमाना माँ बेटों की सपन सँजोए, जल्दी ही अब शादी हो, वह बेटे पर जोर जमाती, बहू जाति अपनी ही हो, नहीं जँची कोई मारवारिण, लगी उसे समझाने फिर, बेटा देखभाल के करना, बहू सिर्फ हिंदू ही हो, सैफ अली का सुन करके, माँ ने यह भी समझाया, बेटा बहू उमर में तुमसे, थोड़ी तो छोटी ही हो, नहीं सुना बेटे ने तो, माँ फिर उससे कहने लगी, काली गोरी से मत करना, बहू सिर्फ देशी ही हो, देख देश में उल्टा-पल्टा, माँ अब यह बिनती करती है, किसी जाति या किसी धर्म की, बहू सिर्फ लड़की ही हो।
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