संयुक्त राज्य अमेरिका से प्रकाशित अंतर्राष्टीय हिन्दी समिति की त्रैमासिक मुख पत्रिका | वर्ष: 26 | अंक: 2 | अप्रैल-जून 2010
 
अप्रैल - जून, 2010
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कविता
नववर्ष पर काव्‍यांजलि
बृजेंद्र श्रीवास्‍तव ‘उत्‍कर्ष’
नया सबेरा

नए साल का नया सबेरा,
जब अंबर से धरती पर उतरे,
तब शांति, प्रेम की पंखुरियाँ
धरती के कण-कण पर बिखरें,

चिड़ियों के कलरव गान के संग,
मानवता की शुरू कहानी हो,
फिर न किसी का लहू बहे,
न किसी आँख में पानी हो,

शबनम की सतरंगी बूँदें,
बरसे घर-घर द्वार,
मिटे गरीबी, भुखमरी
नफरत की दीवार,

ठंडी-ठंडी पवन खोल दे,
समरसता के द्वार
सत्‍य, अहिंसा और प्रेम
सीखे सारा संसार,

सूरज की ऊर्जामय किरणें,
अंतरमन का तम हर ले,
नई सोच के नव प्रभात से,
घर-घर मंगल दीप जलें।।